Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: Date, Moonrise Time & Puja Vidhi
Key Takeaway
When is Bhalchandra Sankashti Chaturthi and what is the moonrise time?
Bhalchandra Sankashti Chaturthi will be observed on Friday, 6 March 2026.
• Moonrise Time: The moon will rise at 09:14 PM (visible around 09:31 PM depending on the city). You must break the fast only after offering Arghya to the moon.
• Bhadra Impact: Bhadra is present during the day (06:41 AM to 05:53 PM), but since it resides in 'Patal Lok', it will not negatively affect the Puja.
• Significance: Worshipping the "Bhalchandra" form of Ganesha removes mental stress and blesses the devotee with sharp intellect.

चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को 'भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी' के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखकर विघ्नहर्ता भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करते हैं। संकष्टी चतुर्थी का व्रत रात में चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है।
🌕 चंद्रोदय का समय (Moonrise)
09:14 PM
(कुछ पंचांगों और शहरों के अनुसार चांद 09:31 PM तक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। अर्घ्य देकर ही व्रत खोलें।)भद्रा का प्रभाव (Safe for Puja)
इस दिन भद्रा काल सुबह 06:41 बजे से शुरू होकर शाम 05:53 बजे तक रहेगा। हालांकि, इस भद्रा का वास पाताल लोक में है। शास्त्रों के अनुसार, पाताल लोक की भद्रा पृथ्वी वासियों के पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों में कोई बाधा उत्पन्न नहीं करती है। अतः आप निश्चिंत होकर पूजा कर सकते हैं।
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संकल्प और स्थापना: प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। पूजा स्थान की सफाई कर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
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श्रृंगार व अर्पण: गणेश जी को हल्दी, रोली और अक्षत से तिलक करें। घी का दीपक जलाकर पुष्प, माला और विशेष रूप से दूर्वा (Durva grass) अर्पित करें।
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मंत्र और कथा: पूजा के दौरान श्रद्धा भाव से “ॐ भालचंद्राय नमः” मंत्र का जाप करें और संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें। मोदक और लड्डू का भोग लगाएं।
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चंद्र अर्घ्य (Evening Ritual): शाम के समय पुनः पूजा करें। रात 09:14 बजे के बाद चंद्रोदय होने पर, चंद्र देव के दर्शन करें और उन्हें जल, दूध और अक्षत से अर्घ्य (Arghya) अर्पित करें।
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पारण (Breaking the Fast): चंद्रमा की पूजा के बाद भगवान गणेश का प्रसाद ग्रहण करें और सात्विक भोजन के साथ अपना व्रत खोलें।
✨ 'भालचंद्र' रूप का अद्भुत महत्व
'भालचंद्र' का अर्थ है—जिसके मस्तक (भाल) पर चंद्रमा विराजमान हो। ज्योतिष और आध्यात्म में चंद्रमा 'मन' का कारक है और गणेश जी 'बुद्धि' के देवता हैं।
इस विशेष रूप की पूजा करने से व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता बढ़ती है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं, और मानसिक तनाव (Stress) से मुक्ति मिलती है। जो भक्त चंद्रमा को अर्घ्य देकर यह व्रत पूर्ण करते हैं, भगवान गणेश उनके जीवन के सभी विघ्न हर लेते हैं।