Extramarital Affairs in Astrology: 26 Yogas for Illicit Relationships (कुंडली में अवैध संबंध के योग)

Key Takeaway

In Vedic astrology, illicit relationships (अवैध संबंध) and extramarital affairs are primarily driven by the afflictions of the Moon (mind), Venus (lust and romance), Mars (passion and physical energy), and Rahu (taboo desires). The 5th house (romance), 7th house (marriage), and 12th house (bed pleasures) play crucial roles. Conjunctions like Venus-Mars or Venus-Rahu in these houses often indicate a highly passionate nature leading to affairs. A weak 7th house or afflicted Moon can cause dissatisfaction in marriage, prompting individuals to seek physical or emotional fulfillment outside wedlock. However, astrology also states that true mutual love and understanding between partners can conquer these malefic planetary effects.

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💔 Extramarital Affairs in Astrology

कुंडली में अवैध संबंध और कामवासना के ज्योतिषीय कारण (26 Astrological Yogas)

अवैध संबंध (Illicit relationships) का सीधा अर्थ यौन इच्छा और भावनाओं के भटकाव से है। कई बार वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी के बीच प्रेम, मान और सम्मान न मिलने के कारण स्त्रियां या पुरुष किसी अन्य का संग चाहते हैं, ताकि वे अपने मन में दबी भावनाओं को प्रकट कर सकें। ज्योतिष शास्त्र (Vedic Astrology) में इस विषय पर बहुत स्पष्टता मिलती है कि व्यक्ति का मन और वासना किन ग्रहों के कारण भटकती है।
योग बनाम भोग (True Love vs. Lust): कामवासना शरीर और जीवन का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। किन्तु वासना की तृप्ति के साथ जब प्रेम का रस मिला दिया जाता है, तो वह 'योग' बनता है जिससे सृष्टि का निर्माण होता है। पति-पत्नी में यदि शुद्ध प्रेम हो, तो वह कामवासना पर विजय प्राप्त कर अवैध संबंध जैसे जहर पर अंकुश लगा सकता है।

🪐 कामवासना और अवैध संबंध के मुख्य कारक ग्रह

चन्द्रमा (Moon)

चन्द्रमा मन का कारक है। कामवासना और किसी के प्रति आकर्षण सबसे पहले मन से ही जागता है।

शुक्र (Venus)

शुक्र भोग-विलास, रोमांस, सौन्दर्य और वैवाहिक जीवन (7th Lord) का मुख्य कारक ग्रह है।

मंगल (Mars)

मंगल शारीरिक ऊर्जा, जोश, रक्त और विवाह पश्चात बनने वाले संबंधों की उग्रता को दर्शाता है।

राहु और शनि

राहु मर्यादाएं तोड़ता है (Taboos), और शनि वैराग्य या संबंधों में नीरसता/अति-कामुकता पैदा करता है।

ज्योतिष में लग्न व्यक्ति स्वयं होता है, पंचम भाव प्रेम/प्रेमिका का, और सप्तम भाव पत्नी/विवाह का होता है। द्वादश भाव शय्या सुख (Bed pleasures) का है। इन भावों का आपसी संबंध अवैध संबंधों को जन्म देता है।

📜 कुंडली में अवैध संबंध बनाने वाले 26 प्रमुख योग

  • शनि और शुक्र की युति: जन्म कुंडली में शनि और शुक्र की युति वैवाहिक जीवन में किसी अन्य (तीसरे व्यक्ति) का आना बताती है।
  • पंचम भाव का प्रभाव: पंचम भाव में शनि, शुक्र और मंगल की युति सीधे तौर पर अवैध संबंध का निर्माण करती है।
  • मंगल-शुक्र (मेष/वृश्चिक): मेष या वृश्चिक राशि में मंगल के साथ शुक्र के होने से पराई स्त्री/पुरुष से घनिष्ठता बनती है।
  • सुनफा योग का नकारात्मक प्रभाव: यदि चन्द्रमा से द्वितीय स्थान में शुक्र हो तो 'सुनफा योग' बनता है। ऐसा जातक आकर्षक होता है और अन्य स्त्रियों से शारीरिक संबंध की प्रबल संभावना होती है।
  • लग्न में शुक्र की युति: द्वितीय, छठे और सप्तम भाव के किसी भी स्वामी के साथ शुक्र की युति यदि लग्न में हो, तो जातक का चरित्र संदेहग्रस्त होता है।
  • मीन लग्न में सूर्य-शुक्र: सूर्य और शुक्र की युति मीन लग्न में होने से जातक अत्यंत कामुक होता है और वासना की तृप्ति शीघ्र नहीं होती।
  • सप्तम में बुध-शुक्र: बुध और शुक्र की युति यदि सप्तम भाव में हो तो जातक अवैध संबंधों के लिए नए-नए तरीके (Nutan tareeke) अपनाता है।
  • समलिंगी या बड़ों से संबंध: यदि सप्तम भाव पर शनि और मंगल की युति हो तो जातक समलिंगी (Homosexual) प्रवृत्तियों का हो सकता है। यदि यही युति अष्टम, नवम या द्वादश भाव में हो तो अपने से बड़ों से अवैध संबंध होते हैं।
  • राहु-मंगल-शुक्र: मंगल और राहु की युति अथवा दृष्टि शुक्र पर हो तो जातक कामुक होता है एवं उसका मन भटकता है।
  • सीमाओं का उल्लंघन: लग्न, चतुर्थ, सप्तम या दशम भाव में गुरु पर मंगल-शुक्र का प्रभाव और चन्द्रमा पर राहु का प्रभाव हो तो व्यक्ति अवैध संबंध बनाने के लिए सभी मर्यादाएं लांघ देता है।
  • शनि का लग्न या पंचम में होना: लग्न में शनि कामवासना अधिक देता है। पंचम भाव में शनि होने से व्यक्ति अपने से बड़ी उम्र की स्त्रियों के प्रति आकर्षित होता है।
  • वेश्यागामी योग: शनि का सप्तम भाव में चन्द्रमा के साथ होना और मंगल की दृष्टि पड़ने से जातक वेश्यागामी होता है। यदि शुक्र का भी संबंध बन जाए तो अवैध संबंध निश्चित है।
  • नीच चन्द्रमा का पाप प्रभाव: चन्द्रमा कहीं भी नीच का हो और पाप प्रभाव में हो तो नौकर/नौकरानी से संबंध बनते हैं। यही दूषित चन्द्रमा नवम भाव में हो तो गुरु या बड़ों के साथ संबंध बनते हैं।
  • कामुकता में अंधापन: मंगल सप्तम में और सूर्य/राहु चतुर्थ में हो तो व्यक्ति कामुकता में अंधा होकर पशु समान कार्य करता है।
  • अष्टम भाव में राहु: राहु का अष्टम भाव (छिपी हुई चीजें) में होना जातक का अवैध संबंध कराता है।
  • तुला राशि में चार ग्रह: तुला राशि (शुक्र की राशि) में चार ग्रह एक साथ होने से परिवार में क्लेश होता है, जिसके कारण व्यक्ति बाहर अवैध संबंध बनाता है।
  • विरोधाभासी मन: दशम भाव में शनि और कहीं भी शुक्र-मंगल की युति हो, तो जातक ज्ञानवान होता है लेकिन वासना का दास भी बन जाता है। उसका मन स्थिर नहीं रहता।
  • नीरसता (Impotency): बुध और शनि का संबंध सप्तम भाव से हो तो ऐसे जातक यौन क्रियाओं में नीरस या अयोग्य (uninterested/incapable) होते हैं।
  • सूर्य का सप्तम भाव में होना: सप्तम में सूर्य वैवाहिक जीवन में भारी क्लेश उत्पन्न करता है, जिससे परेशान होकर जातक बाहर संबंध बनाता है।
  • कार्यालय (Office) में प्रेम प्रसंग: सप्तम भाव में राहु-शुक्र या राहु-चन्द्रमा हों और गुरु द्वादश भाव में हो, तो विवाह पश्चात कार्यालय (Workplace) में ही अवैध संबंध बनते हैं।
  • शीघ्रपतन और चरित्र नाश: बुध और शनि द्वादश में हों तो शारीरिक दुर्बलता आती है। इसी योग में लग्न/सप्तम/अष्टम में राहु हो तो जीवनसाथी किसी अन्य से शारीरिक तृप्ति लेता है।
  • लंपट योग: यदि मंगल (जोश), शुक्र (भोग) और 12वें भाव (शय्या सुख) के स्वामी का संबंध सप्तम भाव से हो तो व्यक्ति लंपट होता है (अनेक स्त्रियों से संबंध)।
  • सात ग्रहों का खेल: चन्द्रमा, मंगल, शुक्र, राहु और पंचम, सप्तम व द्वादश भाव का आपसी संबंध अवैध संबंध का मुख्य निर्माण करते हैं।
  • शुक्र और मंगल का स्वभाव: मंगल शारीरिक शक्ति है, शुक्र रोमांस और कामेच्छा जगाता है। शनि आलोचना और वैराग्य के बीच अवैध संबंधों का कारक बनता है।
  • लग्न में सूर्य-शुक्र: शुक्र और सूर्य की युति यदि लग्न में हो तो व्यक्ति अत्यधिक व्याभिचारी होता है।
  • सच्चा प्रेम (True Love): अपवाद: मंगल और शुक्र की युति यदि पंचम भाव (प्रेम का भाव) में हो, तो दो लोगों के बीच अत्यंत गहरा और सच्चा प्रेम (True Love) होता है।
🌟 निष्कर्ष (Conclusion): यद्यपि ग्रहों के योग व्यक्ति की भावनाओं को भटका सकते हैं, लेकिन सच्चा प्रेम, आपसी समझ और ध्यान (Meditation) किसी भी नकारात्मक योग के प्रभाव को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं।

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