Holika Dahan 2026: Date, Shubh Muhurat, Puja Vidhi & Prahlad Katha
Key Takeaway
When is Holika Dahan in 2026?
Holika Dahan will be celebrated on Monday, 2nd March 2026.
• Why the 2nd? The Phalguna Purnima begins at 05:55 PM on March 2. Because there is a Lunar Eclipse (Chandra Grahan) on March 3, astrologers advise performing the sacred Holika fire on the evening of March 2.
• Significance: It symbolizes the victory of truth over evil, remembering how Lord Vishnu protected His devotee Prahlad from the fire while the demoness Holika burned.
• Ritual: Devotees worship the fire, offer crops, tie raw thread (Mauli), and apply the holy ash to their foreheads to ward off negativity.

फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होलिका दहन भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। यह अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का दिव्य प्रतीक है।
होलिका दहन 2026 की तिथि और चंद्र ग्रहण का प्रभाव
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 02 मार्च को शाम 05:55 बजे होगी और इसका समापन 03 मार्च को शाम 05:07 बजे होगा।
चूंकि 03 मार्च को चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) लग रहा है, इसलिए ज्योतिषियों और पंचांग के अनुसार होलिका दहन 02 मार्च (सोमवार) की संध्या/रात्रि को ही किया जाएगा।
श्रीमद् भागवत पुराण के अनुसार, हिरण्यकशिपु नामक अत्याचारी असुरराज ने स्वयं को भगवान घोषित कर दिया था। किंतु उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान श्रीहरि विष्णु का परम भक्त था।
हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को मृत्यु के मुख में धकेलने के कई प्रयास किए। अंततः उसने अपनी बहन होलिका (जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था) को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को गोद में लेकर भयंकर अग्नि में बैठे।
लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से चमत्कार हुआ! होलिका का वरदान निष्फल हो गया और वह अग्नि में भस्म हो गई, जबकि भक्त प्रह्लाद पूर्णतः सुरक्षित बाहर निकल आए। यही घटना आज भी बुराई के अंत के रूप में 'होलिका दहन' के नाम से मनाई जाती है।
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तैयारी: होलिका दहन स्थल को शुद्ध करें। वहां सूखी लकड़ियों और गाय के गोबर के उपलों का ढेर सजाएं।
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पूजन सामग्री: रोली, अक्षत, पुष्प, जल, गुड़, हल्दी, साबुत मूंग और नई फसल की गेहूं की बालियों से होलिका का विधि-विधान से पूजन करें।
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परिक्रमा (Parikrama): कच्चा सूत (मौली) लें और होलिका के चारों ओर लपेटते हुए 3 या 7 परिक्रमा करें। अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतानों की रक्षा हेतु प्रार्थना करें।
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भस्म का तिलक: होलिका दहन के पश्चात, अग्नि की पवित्र राख (Bhasma) को घर लाएं और उसे माथे पर लगाएं। यह नकारात्मक शक्तियों को दूर करती है और जीवन में शांति लाती है।
🕉️ धार्मिक महत्व (Spiritual Meaning)
होलिका दहन को पापों के दहन और नव जीवन के आरंभ का प्रतीक माना जाता है। अग्नि देवता को साक्षी मानकर हम अपने भीतर के नकारात्मक भाव—क्रोध, ईर्ष्या, लोभ और अहंकार—को इस पवित्र अग्नि में भस्म कर आत्मशुद्धि का संकल्प लेते हैं।
🤝 सांस्कृतिक महत्व (Cultural Unity)
यह पर्व सामाजिक समरसता का प्रतीक है। गांवों और मोहल्लों में सामूहिक रूप से होलिका दहन किया जाता है, जिससे लोग अपने मतभेद भुलाकर एक साथ आते हैं। यह हमें सदैव विनम्रता, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
"आइए, इस फाल्गुन पूर्णिमा पर हम भी अपने जीवन की नकारात्मकताओं को होलिका की अग्नि में समर्पित करें और प्रह्लाद की अटूट भक्ति को अपने हृदय में स्थान दें।"