Holi & Chandra Grahan: Can We Play Colors During Sutak? Rules & Truths
Key Takeaway
Can we play Holi during the Lunar Eclipse (Grahan) Sutak?
Yes! According to Panchang and astrology, the rules of Grahan and Sutak apply to religious worship, eating, and pregnant women, but they do not restrict the celebration of Rangotsav (Holi).
• Verdict: Dhulandi should be celebrated joyously on Tuesday, 3rd March right from the morning after Holika Dahan.
• Precautions: Do not touch idols, avoid cutting objects, put Tulsi in food, and pregnant women must stay indoors away from eclipse rays.

जब भी होली (Holi) और चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) का संयोग एक साथ बनता है, तो जनमानस में सूतक काल (Sutak Kaal) को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। क्या सूतक में रंग खेला जा सकता है? क्या नियम मानने चाहिए? आइए पंचांग और शास्त्रों के आधार पर इस स्थिति को स्पष्ट करते हैं।
ग्रहण काल में भगवान की मूर्तियों का स्पर्श करना पूरी तरह निषेध होता है। इसी कारण सूतक लगते ही मंदिरों के पट (दरवाजे) बंद कर दिए जाते हैं और पूजन वर्जित होता है।
ग्रहण की नकारात्मक चंद्र किरणों का गर्भस्थ शिशु पर दुष्प्रभाव हो सकता है। इसलिए गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण के समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और किरणों से बचना चाहिए।
ग्रहण काल के दौरान काटने या सिलने के कार्य वर्जित माने गए हैं। इसलिए इस समय सुई, कैंची, चाकू जैसी धारदार वस्तुओं का प्रयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
ग्रहण काल में वातावरण में फंगस (Fungus) और बैक्टीरिया पनपने की दर बढ़ जाती है। इसलिए इस समय पकाया हुआ भोजन न करें। सूतक लगने से पहले ही जल और रसोई में तुलसी दल डाल देना चाहिए।
हाँ, बिल्कुल! ग्रहण के सूतक का उपरोक्त नियमों (भोजन, पूजा, सुरक्षा) के अलावा रंगोत्सव (Holi/Colors) से कोई सीधा संबंध नहीं है।
होलिका दहन के जलने की सूचना पर जनमानस द्वारा प्रकट किया गया उल्लास ही धुलेंडी है। इसे होलिका दहन के ठीक बाद प्रातः काल से ही बिना किसी संशय के मनाया जाना चाहिए। जब हम पंचांग पर विश्वास रखते हैं, तो पंचांग की इस बात को भी मानना चाहिए।