Sant Eknath Shashthi 2026: Date, Paithan Mahotsav & Spiritual Significance
Key Takeaway
When is Sant Eknath Shashthi in 2026?
Eknath Shashthi will be observed on Monday, March 9, 2026.
• Significance: It marks the death anniversary (Sanjeevan Jal Samadhi) of the great Marathi saint, Sant Eknath Maharaj, who entered the Godavari river at age 72 chanting Lord Vitthal's name.
• Celebration: A massive 3-day festival called 'Paithan Mahotsav' is held in Maharashtra. Millions of Warkaris gather, take holy baths in the river, sing Abhangs, and perform his famous 'Bharud'.
• Prasad: 'Puranpoli' is the main traditional offering made to the saint on this day.

संत एकनाथ महाराज (1533 ईस्वी – 1599 ईस्वी) महाराष्ट्र की भक्ति परंपरा (वारकरी संप्रदाय) के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मार्गदर्शक संत हैं। 72 वर्ष की आयु में फाल्गुन वद्य षष्ठी के दिन उन्होंने सदेह जल समाधि ली थी। उन्होंने 'शांति ब्रह्मा' के रूप में अपना सांसारिक कार्य पूरा किया और भगवान विट्ठल का नाम जपते हुए गोदावरी नदी में प्रवेश किया।
उनका जीवन मानव प्रेम का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने जीवन भर जातिगत भेदभाव का कड़ा विरोध किया। अछूतों के घरों में भोजन करना और एक प्यासे गधे को पवित्र गंगा जल पिलाना उनके 'भूतदया' (सभी जीवों पर दया) के अमर उदाहरण हैं।
एकनाथ षष्ठी के अवसर पर महाराष्ट्र के पैठण में एक विशाल जुलूस निकाला जाता है। यह भव्य आध्यात्मिक त्योहार तीन दिनों तक चलता है:
(कावड़)
वारकरी और गोदावरी जल
राज्य भर से लाखों वारकरी श्रद्धालु नंगे पैर गोदावरी नदी की 'कावड़ी' (जल पात्र) लेकर पैठण नगरी में प्रवेश करते हैं। पूरा वातावरण विट्ठल-नाम से गूंज उठता है।
(नाथ षष्ठी)
पादुका पूजन और स्नान
9 मार्च (षष्ठी) के दिन संत एकनाथ की पवित्र पादुकाओं की विशेष पूजा की जाती है और भव्य पालकी समारोह आयोजित किया जाता है। भक्त गोदावरी में पवित्र स्नान कर नाथ के दर्शन करते हैं।
(काला / सप्तमी)
उत्सव का समापन
यह त्योहार षष्ठी के दूसरे दिन (सप्तमी) को 'काला' (प्रसाद वितरण) की रस्म के साथ शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त होता है।
🎭 भारुड और भजन परंपरा
एकनाथ महाराज के 'भारुड' (Bharud) के बिना यह उत्सव अधूरा है। भारुड एक प्रकार का लोकगीत/नाटक है जिसका उद्देश्य मनोरंजन के माध्यम से समाज को शिक्षित करना और अंधविश्वासों को मिटाना है। पैठण के नाथ महल में 24 घंटे भजनों की निरंतर गूंज सुनाई देती है।
🍽️ महाप्रसाद: पूरनपोली
इस पावन अवसर पर मुख्य रूप से 'पूरनपोली' (Puranpoli) का महाप्रसाद चढ़ाया जाता है। महाराष्ट्र में ऐसी धार्मिक मान्यता है कि नाथों को पूरनपोली का नैवेद्य अत्यंत प्रिय था।
📚 संत एकनाथ महाराज की अमर रचनाएँ
संत एकनाथ एक महान कवि और समाज सुधारक थे। उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान को संस्कृत से निकालकर आम आदमी की भाषा (मराठी) तक पहुंचाया। उनकी प्रमुख रचनाओं में शामिल हैं:
एकनाथी भागवत (श्रीमद्भागवत के 11वें अध्याय पर मराठी टीका) • भावार्थ रामायण • चतुश्लोकी भागवत • रुक्मिणी स्वयंवर • आनंद लहरी • और हजारों अभंग व गावलान।