Cheti Chand 2026: Sindhi New Year Date, Muhurat, Significance & Puja Vidhi
Key Takeaway
When is Cheti Chand in 2026 and how is it celebrated?
Cheti Chand (Sindhi New Year) will be celebrated on Friday, March 20, 2026.
• Puja Muhurat: The most auspicious time for worship is in the evening from 06:40 PM to 07:50 PM.
• Significance: It marks the birth anniversary of Lord Jhulelal (incarnation of the Water God, Varun Dev), who protected the Sindhi culture.
• Rituals: Devotees prepare 'Behrana Sahib' (a sacred offering), light a 5-wick lamp (Jyot Jagan), and immerse it in a river or lake while singing the 'Pallav' prayer.

विविधता में एकता का प्रतीक भारत एक अद्भुत जगह है। सिंधी समुदाय का भव्य त्योहार चेटीचंड (Cheti Chand) भी एक ऐसा ही त्योहार है। यह वरुण देव (जल देवता) साई झूलेलाल (जिनका एक नाम उदरोलाल भी है) का जन्मदिन समारोह है।
सिंधियों के लिए, चेटीचंड नए साल की शुरुआत का प्रतीक है। मराठी नव वर्ष में आने वाले गुड़ी पड़वा के समान ही, चेटीचंड सिंधी समुदाय के नववर्ष की शुरूआत माना गया है। बहुत से लोग इस दिन पूर्णिमा या अमावस्या के आस-पास किसी झील या नदी के किनारे दूध और आटे में चावल मिलाकर ‘अखो’ चढ़ाने जाते हैं।
🗓️ सिंधी नव वर्ष की तिथि
चेटीचंड आम तौर पर चैत्र शुक्ल पक्ष के पहले दिन (सिंधी महीने 'चेत' की शुरुआत) मनाया जाता है।
🪔 चेटीचंड पूजा का शुभ मुहूर्त
06:40 PM - 07:50 PM शाम का समय (Evening)जल देवता और भगवान झूलेलाल की पूजा एवं आरती के लिए यह समय अत्यंत शुभ माना गया है।
✨ चेटीचंड का क्या महत्व है?
सिंधी समुदाय इस त्योहार को भगवान झूलेलाल के जन्मदिन समारोह के रूप में मनाता है। मान्यता है कि इसी पावन दिन वरुण देव (Water God) झूलेलाल के रूप में अवतरित हुए थे। उन्होंने सिंधी संस्कृति और हिंदू धर्म को विलुप्त होने से बचाने के लिए यह अवतार लिया था। अतः इस दिन जल देवता की विशेष पूजा कर उनका आभार जताया जाता है।
हिंदू पंचाग के चैत्र माह को सिंधी समुदाय द्वारा ‘चेत’ (Chet) कहा जाता है। उनके पंचांग के अनुसार प्रत्येक नया महीना 'चांद' से शुरू होता है। इसलिए इस उत्सव को 'चेटीचंड' नाम दिया गया है।
इस दिन सिंधी समुदाय के लोग विभिन्न अनुष्ठान करते हैं और कई लोग लगातार 40 दिनों तक प्रार्थना करते हैं (जिसे चालिहो / Chaliho के नाम से जाना जाता है)। व्रत पूर्ण होने पर फलों को ग्रहण कर अपना व्रत तोड़ते हैं। मुख्य अनुष्ठान इस प्रकार हैं:
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बहराना साहिब (Behrana Sahib): आटे का एक सुंदर 'भेंट' बनाते हैं। इसमें तेल का दीया, इलायची, चीनी, फल और 'अखो' रखा जाता है। साथ ही भगवान झूलेलाल की प्रतिमा भी रखी जाती है।
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ज्योति जगन (Jyot Jagan): गेंहू के आटे का एक विशेष दीपक बना कर उसमें पांच बाती (5 wicks) वाली बत्ती जलाई जाती है।
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पल्लव और विसर्जन: बहराना साहिब को किसी झील या नदी के किनारे ले जाकर पानी में विसर्जित किया जाता है। भगवान को प्रसन्न करने तथा आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए 'पल्लव' (Pallav) गाए जाते हैं और प्रसाद बांटा जाता है।
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दान और संस्कृति: इस दिन जरूरतमंदों को भोजन तथा कपड़े देने जैसे धर्मार्थ कार्य किए जाते हैं। लोग नाटक, नृत्य (छेज/Chhej), और संगीत के माध्यम से अपनी समृद्ध संस्कृति का प्रदर्शन करते हैं।