Masik Shivratri March 2026: Date, Nishita Kaal Muhurat, Puja Vidhi & Significance
Key Takeaway
When is Masik Shivratri in March 2026?
Masik Shivratri will be observed on Tuesday, 17 March 2026.
• Puja Timing (Nishita Kaal): The most auspicious time to worship Lord Shiva on this day is during midnight (Nishita Kaal), which falls between 12:07 AM and 12:55 AM (night of 17th March).
• Significance: Worshipping the Shivling with milk, Ganga Jal, and Belpatra on this day removes life's obstacles and blesses the devotee with a desired life partner and marital harmony.

शिव भक्तों के लिए शिवरात्रि और महाशिवरात्रि का खास महत्व होता है। वहीं हर महीने पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि की पूजा भी काफी अहम होती है। बता दें कि साल में कुल 12 मासिक शिवरात्रि पड़ती हैं। मान्यता है कि इस दौरान जो कोई भी भगवान शिव और मां पार्वती की सच्चे मन से पूजा करता है, उसे मनपसंदीदा जीवनसाथी जरूर मिलता है। साथ ही, भगवान शिव और मां पार्वती के आशीर्वाद से जीवन में आने वाली सारी बाधाएं खत्म हो जाती हैं।
मार्च 2026 में मासिक शिवरात्रि कब है?
🗓️ चतुर्दशी तिथि का समय
हर महीने जब भी कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि आती है तब मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है।
तिथि शुरू: 17 मार्च 2026, सुबह 09:23 बजे तिथि समाप्त: 18 मार्च 2026, सुबह 08:25 बजे व्रत का दिन: 17 मार्च 2026 (मंगलवार)🌌 निशिता काल पूजा मुहूर्त
12:07 AM - 12:55 AM मध्यरात्रि (17 मार्च की रात)भगवान शिव की पूजा वैसे तो कभी भी कर सकते हैं, लेकिन निशिता काल (मध्यरात्रि) की पूजा सबसे उत्तम मानी जाती है। पंचांग के हिसाब से पूजा के लिए कुल 48 मिनट का यह शुभ मुहूर्त बहुत ही खास रहने वाला है।
मासिक शिवरात्रि की पूजा आसान और भक्तिभाव से की जाती है। पूजा के लिए नीचे दिए गए नियमों का पालन करें:
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सुबह उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। भगवान शिव की तस्वीर या मूर्ति के आगे व्रत का संकल्प लें और मंदिर की साफ-सफाई कर लें।
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भगवान शिव और मां पार्वती की तस्वीर या मूर्ति को चौकी पर कपड़ा बिछाकर रख दें। कोशिश करें कि कपड़ा लाल रंग का ही हो।
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ऐसे करें शिवलिंग का जलाभिषेक: शिवलिंग का जलाभिषेक शुद्ध गंगाजल, दही, दूध, और शहद से करें। इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएं।
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"ॐ नमः शिवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें। बाद में भगवान शिव की चालीसा का पाठ करें।
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अंत में आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए भगवान से सच्चे मन से माफी मांग लें।
✨ मासिक शिवरात्रि का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, चतुर्दशी तिथि के दिन भोलेनाथ पहली बार शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। उस समय भगवान विष्णु जी और ब्रह्मा जी ने शिवलिंग की सर्वप्रथम पूजा की थी। तभी से इस तिथि को भोलेनाथ के जन्मदिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
पुराणों के अनुसार, इस शिवरात्रि के व्रत को मां सरस्वती, माता लक्ष्मी, सीता मईया, माता गायत्री और देवी पार्वती ने भी किया था। माना जाता है कि इस व्रत को करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है, दांपत्य जीवन खुशहाल रहता है और बेहद पुण्य फल की प्राप्ति होती है।